यमुना की बाढ़ से सहमे एक दर्जन से अधिक गांव के लोग, लालछप्पर में बना रहा पानी आने का खतरा

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उफान पर बहती यमुनानदी। 
उफान पर बहती यमुनानदी। 

यमुनानगर (रादौर)। यमुना नदी में बाढ आने से नदी किनारे बसे जठलाना क्षेत्र के गांव के लोगों की धडकनें भी तेज होनी शुरू हो गई है। यमुना में आई बाढ के बाद स्थानीय प्रशासन बाढ राहत कार्यों को लेकर सर्तक हो गया है। प्रशासन की ओर से मामले को लेकर यमुनानदी किनारे बसे गांव गुमथला, जठलाना, लालछप्पर, संधाला, संधाली, उन्हेडी, एमटी करहेडा आदि गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को यमुनानदी की ओर न जाने की चेतावनी जारी की गई है। वहीं यमुनानदी का जल स्तर कम होने तक किसानों को यमुना पार अपने खेतों में न जाने की अपील की जा रही है। इसके अलावा यमुना की स्थिति पर नजर रखने के लिए संबंधित गांवों में रात के समय पहरे लगाने के आदेश भी दिए गए है, जिससे यमुना का पानी गांव में घुसने पर लोगों को समय पर सर्तक किया जा सके। वीरवार को यमुना का जल स्तर किनारे से कुछ नीचे था। उम्मीद जताई जा रही है कि वीरवार की रात को यमुना का जल स्तर बढने पर गांव लालछप्पर में पानी गांव में घुस सकता है। जठलाना क्षेत्र में यमुना की बाढ आने पर सबसे पहले गांव लालछप्पर में यमुना का पानी गांव में घुसता रहा है। उधर बीडीपीओ रादौर दीनानाथ शर्मा ने बताया कि यमुना में आई बाढ को लेकर ग्राम सचिवों की डयूटियां लगाई गई है। वहीं बीडीपीओ कार्यालय रादौर में बाढ नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। जहां 24 घंटे कर्मचारी तैनात है। बाढ से संबंधित कोई भी सूचना स्थानीय लोग टेलिफोन नंबर 01732-237899 पर दे सकते है।

बाढ प्रभावित गांवों में मुनादी करता ग्रामीण। 
बाढ प्रभावित गांवों में मुनादी करता ग्रामीण।
यमुना पार डेरों में फंसे लगभग 150 ग्रामीण – यमुनानदी में बाढ आने के बाद यमुनापार खेतों में बने डेरों में रहने   वाले ग्रामीणों का क्षेत्र से सपंर्क कट गया है। पुर्व जिला परिषद सदस्य शिवकुमार संधाला ने बताया कि यमुनानदी पार खेतों में बने डेरों में लगभग 150 से अधिक लोग रहते है। वीरवार को यमुनानदी में डेढ लाख क्यूसिक पानी छोडे जाने ेके बाद डेरों में रहने वाले ग्रामीणों का क्षेत्र के लोगों से संपर्क कट गया है। यमुना का पानी कम होने के बाद ही डेरों में रहने वाले लोगों का स्थानीय ग्रामीणों के साथ सर्पंक हो पाएगा। उन्होंने बताया कि यमुनानदी मेें अवैध खनन होने के कारण पानी की गति बढ गई है। जिससे यमुना में भारी पानी छोडे जाने के बावजूद भुमि जल स्तर में सुधार नहीं होगा। अवैध खनन क्षेत्र के लिए बहुत बडा खतरा बन गया है। उन्होंने बताया कि यमुनानदी का पानी कम होने के बाद भुमि को अधिक नुक्सान होता हेै। पानी कम होने के बाद यमुना नदी किनारे की भुमि ढाह लगने से यमुना में गिर जाती है और किसान भुमिहीन हो जाता है। हर वर्ष बडे पैमाने पर यमुना की बाढ से ढाह लगने पर किसानों की भुमि यमुनानदी में गिरकर किसानों को भुमिहीन बना देती है। उधर ग्रामीण मलखानसिंह, मांगेराम ने बताया कि प्रशासन की ओर से बाढ राहत के नाम पर यमुनानदी किनारे बसे गांव के लोगों के लिए कोई सुविधा तक नहीं जुटाई गई है। यमुना में बाढ आने पर गांव में प्रशासन की ओर से लाईफ जैकेट उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। लेकिन आज तक प्रशासन की ओर से बाढ प्रभावित गांवों में कभी लाईफ जैकेट तक उपलब्ध नहीं करवाई गई। वहीं बाढ प्रभावित गांवों के लिए प्रशासन की ओर से किश्तियों का इंतजाम होना चाहिए। गांव में पानी घुसने पर किश्तियों की मदद से प्रभावित ग्रामीणों क ी मदद की जा सकती है। लेकिन प्रशासन की ओर से इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बाढ प्रभावित गांवों के लिए  लाई गई किश्तियां तहसील परिसर रादौर या अन्य कार्यालयों में पडी रहती है। नियमानुसार बाढ के दिनों में इन किश्तियों को बाढ प्रभावित गांवों में लाया जाना चाहिए। लेकिन कभी भी ऐसा नहीं होता। बाढ प्रभावित गांवों के लोग भगवान भरोसे है। प्रशासन के अधिकारी हर वर्ष बाढ आने पर गांवों में चक्कर लगाने आते है और ग्रामीणों को देखकर वापिस चले जाते है।

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