फसलों पर दवाईयों के अधिक छिडकाव से लोग हो रहे है कैंसर का शिकार उचिम मात्रा में करे छिडकाव

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रादौर। कृषि रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग मानव जीवन के लिए खतरनाक है। किसान फसलों पर निर्धारित मात्रा में ही दवाईयों का छिडक़ाव करें। मात्रा से अधिक दवाईयों का छिडक़ाव मनुष्यों, पशुओं व पौधों के लिए घातक साबित होता है। कृषि रसायनों का सुरक्षित उपयोग ही लाभदायक होता है। अत्यधिक दवाईयों का छिडक़ाव दुष्परिणाम लाता है। यह शब्द जागरूक किसान सुरेश खुराना पूर्व सरपंच खेडी लक्खासिंह ने एक भेटवार्ता में कहे। उन्होंने कहा कि किसान फसलों पर सही रसायन का इस्तेमाल करे। सही मात्रा में दवाई डाले। सही समय व सही तरीके से छिडक़ाव करें। किसान कृषि विभाग की ओर से निर्धारित दवाई की मात्रा में ही फसलों पर दवाईयों का छिडक़ाव करें। किसान जैविक खादों का इस्तेमाल करें। कम्पोस्ट, केचुएं की खाद व कुरड़ी का खाद इत्यादि इस्तेमाल करें। भूमि में नाईट्रोजन की मात्रा पहले से अधिक है। इसलिए किसान फसलों पर यूरिया का इस्तेमाल कम करें। अधिक इस्तेमाल से फसल पीली पड़ जाती है। उन्होनें कहा कि दवाईयों के अधिक इस्तेमाल से दस प्रतिशत लोग कैंसर का शिकार हो गएं है। पंजाब के भंटिडा व हरियाणा के फतेहाबाद में कपास की फसल पर अत्यधिक छिडक़ाव होता आ रहा है। जिससे इस क्षेत्र में कैंसर के रोगी अधिक हो गएं है। किसान तीन बार स्प्रे करने की बजाएं दस दस बार दवाई के स्प्रे कर रहा है। जिससे वातावरण जहरीला हो रहा है और बिमारियां बढ़ रही है। किसान दवाईयां देखकर खरीदें। एक्सपाईरी डेट की दवाई न खरीदें। उन्होंने कहा कि बच्चों को रसायन क्षेत्र से दूर रखें। स्प्रे करने के बारे में विस्तार से जानकारी ले। सुरक्षात्मक कपड़े पहने और मौसम के अनुसार छिडक़ाव करें। दवाई के डिब्बें को हाथ से न खोलें। डिब्बें को चाकू से खोलें। किसान दवाई का बिल अवश्य लें। दवाई बेअसर निकलने पर बिल की सहायता से किसान कंपनी व दुकानदार के विरूद्ध न्यायालय में कार्रवाई करवा सकते है।

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