मिलावट: कमाई की आड़ में लोगो की सेहत से खिलवाड़

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*त्योहारों के सीजन में मिलावटखोर हुए सक्रिय
*मिठाइयों का बादशाह लड्डू भी अछूत
*विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र के बाजारों में बिक रहा हैं मीठा जहर
छछरौली। त्योहारों के सीजन में विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का सीजन भी शुरू हो जाता है और मिठाई विक्रेता इस सीजन का सारा साल इंतजार करते हैं देखा जाए तो मिठाई को देख कर हर किसी के मुंह में पानी भी आ जाता है परंतु मिठाई खाने वाले व्यक्ति को यह बात का अंदाजा नहीं होता कि जिस मिठाई के लिए उसके मुंह में पानी आ रहा है कहीं वह मीठा जहर तो नहीं हैं दिवाली से पहले क्षेत्र के अधिकतर मिठाई विक्रेता भारी मात्रा में मिठाई बनाने में सक्रिय हो जाते हैं और चांदी कूटने की तैयारी करते हैं अधिकतर मिठाई तैयार करने के लिए भारी मात्रा में दूध की जरूरत पड़ती है लेकिन इस दूध की भरपाई करना संभव नहीं है इसलिए अधिकतर स्वीट माफिया सिंथेटिक दूध का प्रबंध कर लेते हैं बाजार में मिठाई तैयार करने के लिए लोग काफी सक्रिय पाए जाते हैं भले ही त्योहारों के दिनों में सरकार व स्वास्थ्य विभाग मिलावटी मिठाइयों पर मिलावटी दूध की बिक्री पर रोक लगाने से बंधी दावे जरूर करता है परंतु व्यवहारिक रूप से ऐसा कुछ नहीं किया जाता। प्रत्येक वर्ष स्वास्थ्य मंत्री मिलावट खोरी रोकने के लिए कई तरह की घोषणा करते हैं केवल यह घोषणाएं समाचार पत्रों तक सीमित रह जाती है त्योहारों से पहले तैयार की जा रही मिठाई कथित तौर पर कुछ एक कोल्ड स्टोरों में जमा की मिठाई दिवाली से 1 दिन पहले ही बाहर सजावट के लिए लगाई जाएगी जो कि सीधे तौर पर लोगों की सेहत के लिए हानिकारक होगी। केंद्र सरकार ने मिलावटखोरी पर लगाम कसने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 भले ही लागू किया हो लेकिन इसका कोई खास असर नजर नहीं आ रहा ।
मिठाइयों का बादशाह लड्डू भी इससे अछूता नहीं रहा है-
क्षेत्र के बाजारों में रैडीमेड बूंदी को तैयार करके बेचना लोगों का बिजनैस बन चुका है। मिठाइयों के सौदागरों की तरफ से 3-3 माह पहले घटिया स्तरीय रैडीमेड बूंदी तैयार करके बाजारों में बेची जा चुकी है। अब वह रैडीमेड बूंदी त्यौहारों के दिनों में मिठाई विक्रेताओं की दुकानों का लड्डओं के रूप में शृंगार बन चुकी है। सेहत विभाग की लापरवाही कारण लोग घटिया मिठाइयों और सिंथैटिक दूध, दही, पनीर को जहर के रूप में अपने परिवारों और रिश्तेदारों को परोस रहे हैं जो इंसानी जिंदगियों को भयानक बीमारियों की तरफ ले जा रहा है।
स्वीट माफिया का सूचना तंत्र हुआ तेज-
क्षेत्र के बाजारों में इस बात की भी चर्चा की जा रही है कि अगर स्वस्थ विभाग की सैंपल भरने की कोई योजना होती है तो संबंधित स्वीट माफिया को पहले ही सूचना पहुंच जाती है और दुकानदार अपनी दुकानों के शटर नीचे कर देते हैं इस से साफ पता चलता है कि विभाग की छापेमारी की सूचना पहले ही लोगों तक पहुंच जाती है और विभाग के अधिकारियों को बिना सैम्पल करें खाली हाथ लौटना पड़ता है इसलिए इस धंधे में शुक्रिया धंधे बाज दोनों हाथों से लोगों को चूना लगाने में सक्रिय रहते हैं।
ज्यादा रंगदार मिठाइयां ना खरीदे:खेत्रपाल
समाजसेवी कपिल खेत्रपालका कहना है कि हमे ज्यादा रंगदार मिठाइयों का सेवन नही करना चाहिये।उन्होंने प्रदेश वासियों को प्रदूषण मुक्त दिवाली मन्नाने की अपील भी की।
रिपोर्ट : गुरजीत सिंह

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