हिन्दी दिवस प्‍र महाराजा अग्रसैन स्नातकोत्तर  महाविद्यालय में हुई निबन्ध लेखन प्रतियोगिता

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यमुनानगर। महाराजा अग्रसैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जगाधरी के हिन्दी विभाग द्वारा 10-11 सितम्बर को हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला के सौजन्य से हिन्दी दिवस आयोजनों  के तहत निबन्ध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें सैंकड़ां विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन कॉलेज प्राचार्य डॉ. पी.के.बाजपेयी के प्रेरक उद्बोधन के साथ हुआ। डॉ. बाजपेयी द्वारा अपनी भाषा, राजभाषा, मातृभाषा के गुणात्मक  महत्व पर प्रकाष डाला गया। डॉ. बाजपेयी ने कहा कि राष्ट्र अपनी मातृभाषा के बिना विकास नहीं कर सकता। जितने भी विकसीत राष्ट्र है जैसे रूस,चीन, जर्मनी, स्पेन, जापान आदि के बल ज्ञान-विज्ञान-तकनीक के क्षेत्र में विकास की नई उॅचाइयां छू रहें है। सूचना प्रौधोगिकी व भाषा प्रौधोगिकी के विस्तार से वर्तमान में हिन्दी भाषा भी अपने स्वरूप को संवारते हुए ज्ञान,विज्ञान, तकनीक की भाषा बनती जा रही है।
हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. बहादुर सिंह ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए राजभाषा हिन्दी की वर्तमान  में दषा व विदेषों  में फैले हुए प्रवासी साहित्य पर विस्तार से प्रकाष डाला व उपस्थित विद्यार्थियों  को हिन्दी के माध्यम से खुलते  जा रहे रोजगार  के अवसरों  का विस्तार से उल्लेख किया। डॉ. बहादुर सिंह ने कहा कि हिन्दी कंम्यूटिंग के बढ़ते क्षेत्र व इसके  प्रयोग से विष्व स्तर पर हिन्दी भाषा का वर्चस्व बढ़ने लगा है। आज विष्व में हिन्दी ही एक ऐसी वैज्ञानिक भाषा है जो सहज ही इण्टनैट, फैक्स, ई.मेल पर सवार हो, विभिन्न प्रकार के सॉफटवेयर,शब्दकोषों, वर्तनी-षोधकों, शब्द संसाधकों के बल पर सूचना प्रौद्यागिकी में अपना दबदबा कायम कर सकी है। वर्तमान में हिन्दी कम्प्यूटिंग के माध्यम से हिन्दी ने  पत्रकारिता, साहित्य, षिक्षा, कार्यालयी, आकाषवाणा, दूरदर्षन, विदेषी प्रसारण केन्द्रों, विज्ञापन, अनुवाद आदि क्षेत्रों में प्रयुक्त  होकर षिक्षित युवा बेरोजगारों के लिए आजीविका के द्वार खोल  दिए हैं।
हिन्दी दिवस आयोजकों में ‘राष्ट्र  भाषा हिन्दी की विदेषों में स्थिति’ तथा ‘हिन्दी भाषाःसूचना  व भाषा प्रौद्योगिकी से रोजगार के बढ़ते अवसर’ विषयों पर निबन्ध लेखन प्रतियोगिता हुई जिसमें लगभग 20 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रतियोगिता में प्रथम,द्वितीय, एवं तृतीय स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों  को हरियाणा साहित्य अकादमी  द्वारा क्रमंष 700,500-500,300-300, सांत्वना पुरस्कार 200/- रूपयें का प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करवाने में  उप-प्राचार्य डॉ. करूणा, डॉ. वीरेन्द्र सिंह, प्रौ. अनिल कुमार, प्रौ.पवन त्रिपाठी, मैडम मनीषा मैडम निषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. बहादुर सिंह ने उपस्थित विद्यार्थियों व प्राध्यापकों  का धन्यवाद किया व भविष्य में ऐसे कार्यक्रम करवाते रहने का संकल्प दोहराया।

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