धान की फसल में लग रहा झूलसा रोग, कृषि वैज्ञानिकों ने किया गांवों का दौरा

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बीमारी की रोकथाम के लिए शीथमार दवाई का करें इस्तेमाल
यमुनानगर! चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के वैज्ञानिकों की टीम ने धान की फसल में कीडें व बीमारियों को जानने के लिए खंड रादौर के विभिन्न गांवों में जाकर खेत में खड़ी धान की फसल का दौरा किया।
कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र गोयल ने बताया कि धान की फसल में होने वाली बीमारियों एवं कीडों से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठï पौध सरंक्षण वैज्ञानिक डॉ. रणबीर टाया, जिला विस्तार कीट वैज्ञानिक डॉ. बजरंग लाल शर्मा, व जिला विस्तार शिक्षा की टीम ने (शल्य विज्ञान)डॉ. संदीप रावल की संयुक्त टीम ने गांव दामला, धौडग़, कांजनू, अलाहर, जयपुर, करतापुर, बकाना, चमरौडी, पालेवाला व बरहेडी आदि गांवों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने गांव कांजनू में एक एकड में जीवाणु पत्ता अंगमारी (झूलसा रोग)व गांव करतापुर में एक-दो एकड़ में इस बीमारी का प्रकोप पाया गया। टीम ने गहनता से जांच करने पर पाया कि अधिकतर खेतों में शीथ ब्लाइट रोग या हापर कीडे का प्रकोप था।
कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के संयोजक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नरेन्द्र गोयल ने किसानों  से अपील की कि किसान अपनी फसलों में अंधाधुंध दवाईयों का प्रयोग न करें और फसलों में दवाईयों का प्रयोग करने से पहले पौधें को कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों को दिखाकर ही दवाई का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि धान में कीडों व बीमारी से बचाव के लिए निसरते समय धान में यूरिया का प्रयोग न करे। कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों को धान की फसल में होने वाली इस बीमारी की रोकथाम के लिए शीथमार(3 प्रतिशत)450 मिली लीटर दवाई को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड एक शुरूआती तथा दूसरा 15 दिन के बाद दो छिडकाव करने की सलाह दी। टीम ने किसानों को बताया कि हापर बीमारी की वजह से फसल पीली होकर सूख जाती यह बीमारी गोलाकार टुकडियों में शुरू होती है और धीरे-धीरे इसका प्रकोप बढ़ता जाता है। इस बीमारी से बचाव के लिए 330 मिलीलीटर बुप्रोफेजिन 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड छिडकाव करें।

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