समाज सेवक आनंद जैन ने भगवान श्री पाश्र्वनाथ व भगवान चन्द्र प्रभु जी का जन्म जयन्ती उत्सव का किया संचालन

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यमुनानगर। 1 जनवरी: जैन धर्म के 23 वें तींर्थकर भगवान श्री पाश्र्वनाथ व भगवान चन्द्र प्रभु जी का जन्म जयन्ती उत्सव श्री पाश्र्वनाथ दिग बर जैन मंदिर कन्हैया चौक के सभागार में बड़ी धूम-धाम से मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज सेवक आनंद जैन ने की तथा संचालन आशु जैन ने किया। मुख्‍ य अतिथि के रूप में नव निर्वाचित मेयर मदन चौहान ने शिरकत की। कार्यक्रम का शुभारंभ संजू जैन ने दीप प्रवज्जलन कर के किया। इसके उपरांत पाश्र्वनाथ व चंद्रप्रभु की चालीसा का पाठ किया गया और आरती की गई। आनंद जैन ने बताया कि जैन धर्म के 23 वें तींर्थकर भगवान श्री पाश्र्वनाथ ने आज से लगभग 2800 वर्ष पूर्व तपस्या कर केवल ज्ञान प्राप्त किया था। मुनि अवस्था में जिस समय वह तपस्या कर रह थे उसमें उनके दसभव पूर्व के बैरी कमठ के जीव वयन्तर संबर देव के रूप में सात दिनों तक उपसर्ग किया फिर भी क्षमा, शील एंव संयम युक्त योगी राज पाश्र्व प्रभु क्षुब्ध लगातार 7 दिनों तक शुद्वात्म स्वरूप के ज्ञान ध्यान में लीन थे। प्रभु ने दूसरों की गलतियों को भुलाकर पाखन्ड और धार्मिक हिंसा का विरोध करने का सन्देश दिया। उन्होने आगे बताया कि अपरिग्रह में ब्रह्मचर्य सहज प्रकट हो जाता है प्रभु ने विशुद्व धर्म का उपदेश दिया। यह सन्देश ब्राहमण्, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र से ऊपर उठकर विशिष्ठ कुल जाति की परीधि में नहीं बांधता। मुख्‍य अतिथि मदन चौहान ने जैन धर्म की प्रसंशा करते हुये कहा कि जैन धर्म बहुत ही सच्चा धर्मा है और यह धर्म पूरी तरह से तप-त्याग से भरा हुआ है। इस धर्म पर चल कर मनुष्य अपना जीवन सुधार सकता है। प्रमोद जैन ने आये हुये अतिथियों का धन्यवाद किया और स्मृति चिन्ह देकर समानित किया। इस अवसर पर पं. भाग चंद जैन, संजीव जैन, राजीव जैन, राकेश जैन, रोचक गर्ग, दीपक अग्रवाल, सुशील गोयल, राजीव वासूदेवा, जसवंत अग्रवाल, मनोज जैन आदि उपस्थित रहे।

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