देश का युवा अपनी वैदिक संस्कृति से जुड़े व जोडने का प्रयास करे : वशिष्ठ

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युवा संस्कार, वैदिक धर्म दीक्षा, शपथ एवं संकल्प व अभिनंदन सम्मान समारोह सफलतापूर्वक सम्पन्न
यमुनानगर। युवाओ को वैदिक संस्कृति सभ्यता व संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से केन्द्रीय आर्य युवक परिषद द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय युवा संस्कार अभियान के तहत परिषद की जिला प्रबंधक समिति यमुनानगर की ओर से ग्राम पूर्णगढ में वैदिक धर्म सर्वोपरि वैदिक यज्ञ समारोह विभिन्न चरणों में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। परिषद के जिला अध्यक्ष एवं मुख्य संयोजक आर्य रत्न सौरभ आर्य ने मंच का काबिले-तारीफ संचालन किया और उनके कुशल नेतृत्व में यह भव्य आयोजन विभिन्न चरणों में युवा संस्कार, वैदिक धर्म शिक्षा दीक्षा, राष्ट्र सेवा परमो धर्म शपथ एवं संकल्प व युवा सम्मान समारोह के रूप में सम्पन्न हुआ। स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में आचार्य अशोक शास्त्री यमुनानगर ने यज्ञ ब्रह्मा के रूप मे वैदिक मंत्रोंच्चारण सहित यज्ञ सम्पन्न कराया। जेएमआईटी कालेज के प्रोफेसर दीपक गौड मुख्य अतिथि, सत्यार्थ सेवा संस्थान के मुख्य सलाहकार अजय बंसल विशिष्ट अतिथि व सरपंच राजेश कुमार सैनी ग्राम पूर्णगढ समारोह अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए और एडवोकेट यजवेन्द्र सिंह जिला न्यायालय जगाधरी ने युवाओं को वैदिक संस्कृति से जुडकर समाज सेवा व राष्ट्र सेवा का दायित्व निर्वाह करने की शपथ व संकल्प ग्रहण करवाया।
समारोह में परिषद की ओर से जिला यमुनानगर के 15 युवाओं को अतिथिगणों ने प्रशस्ति पत्र सप्रेम भेंट करते हुए सम्मानित किया और ग्राम पंचायत की ओर से अतिथि मण्डल का स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन सम्मान किया गया। समारोह के विशेष सहयोगी सरपंच राजेश कुमार सैनी, सह संयोजक जतिन्द्र सिंह, सुरक्षा प्रभारी
रामचन्द्र प्रजापति को महर्षि दयानंद सरस्वती का चित्र व सत्यार्थ प्रकाश भेंट सम्मानित किया गया। देवबंद उत्तरप्रदेश से पधारे स्वर्णकार पदक विभूषित आकाशवाणी और दूरदर्शन के भजनोपदेशक आचार्य पंडित राधेश्याम वशिष्ठ ने स्वामी दयानंद सरस्वती और सत्यार्थ प्रकाश से जड़े प्रसंग, भजन व उपदेश सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य वशिष्ठ ने कहा की देश के युवा अपनी वैदिक संस्कृति से स्वयं जुड़े और जोडने का प्रयास करे तभी देश में वैदिक परम्परा को पुनः स्थापित किया जा सकता है। मुख्य संयोजक आर्य रत्न सौरभ आर्य ने बताया की परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा अनिल आर्य के दिशा-निर्देश अनुसार पूरे भारत में यह राष्ट्रीय अभियान हर वर्ष आयोजित किया जाता और देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा समाज सेवा से जोडने का सराहनीय प्रयास किया जाता है जिसकी सराहना भारत सरकार भी करती है। उन्होंने शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों से मांग की है की वो शिक्षण संस्थानों में संस्कारयुक्त शिक्षा ग्रहण कराएं तभी भारत वैदिक भारत बन सकता है।
समारोह को सफल बनाने में पंच सदस्य शिवराम, मांगेराम, राजबीर, सतीश, रामकुमार, जगमाल, राजबीर, लक्षमण, आयुष वर्मा, पारस, अमन वर्मा, रजत बंसल आदि ने सराहनीय सहयोग दिया।

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